चाहे हम खुश हों या उदास, संगीत सभी भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया
नवराज टाइम्स नेटवर्क
संगीत एक ऐसी कला है, जो मन को सुकून देकर खुशी महसूस करवाती है और संगीत भावनाओं को व्यक्त करने का जरिया माना जाता है। बड़ों के लिए अपनी भावनाओं को समझना आसान होता है, लेकिन बच्चे ऐसा नहीं कर पाते हैं। ऐसे में संगीत उनका सहारा बन सकता है। संगीत छोटे बच्चों की कम उम्र से ही भावनाओं को पहचानने में मदद कर सकता है।
आक्रामक होने का खतरा
मनोविज्ञान विभाग के शोधकर्ताओं ने यह अध्ययन किया है। संगीत के माध्यम से भावहीन व्यवहार से जुड़े लक्षणों वाले बच्चों की भावनाओं को समझने का प्रयास करना चाहते थे। जो बच्चे सहानुभूति या अपराधबोध जैसी भावनाओं का अभाव महसूस करते हैं, उनके आक्रामक होने का खतरा ज्यादा रहता है। इसी कारण से शोधकर्ता छोटी उम्र से ही बच्चों को संगीत के माध्यम से भावबोधक बनाने की कोशिश में जुटे थे।
ज्यादा मुश्किल नहीं होती
शोधकर्ताओं के इस अध्ययन के नतीजों में सामने आया कि बच्चे संगीत के माध्यम से भावनाओं की पहचान ज्यादा सटीकता से कर सकते हैं। उम्र के साथ उनका प्रदर्शन भी बेहतर होता जाता है। इसके अलावा जिन बच्चों के माता-पिता उन्हें कठोर-भावनाहीन वाले लक्षणों में ज्यादा अंक देते हैं, वे संगीत में भावनाओं की पहचान कम कर पाते हैं। हालांकि उन्हें डरावना संगीत पहचानने में ज्यादा मुश्किल नहीं होती।
देखकर आश्चर्य हुआ
शोधकर्ताओं ने कहा, हमें पता चला है कि बच्चे ३ साल की उम्र में भी भावनाओं को सही भावनात्मक संगीत से मिलाने में अच्छे होते हैं। यह इस बात पर जोर देता है कि संगीत भावनात्मक समाजीकरण और सामाजिक कौशल शिक्षण के लिए कितना महत्वपूर्ण हो सकता है। नतीजे साफ तौर पर कहते हैं कि संगीत सुनने से बच्चे अपनी भावनाओं को समझना और व्यक्त करना सीख सकते हैं। शोधकर्ताओं को यह देखकर आश्चर्य हुआ कि कठोर-भावनाहीन लक्षणों वाले बच्चे भी संगीत सुनकर भय को पहचानने में सक्षम थे। इससे पता चलता है कि संगीत भावना पहचानने के लिए अद्वितीय रूप से उपयुक्त हो सकता है।
