सरकारी स्कूलों में मीड डे मिल राशन की कमी के चलते ड्राई समान हो रहा वितरित : दीपांशु बंसल 

नवराज टाइम्स नेटवर्क

पिंजौर, 21 अक्टूबर। हरियाणा के सरकारी स्कूलो में मीड डे मिल राशन की कमी होने को लेकर कांग्रेस छात्र इकाई एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपांशु बंसल एडवोकेट ने शिक्षा मंत्री महिपाल ढांडा समेत स्कूल एजुकेशन के डायरेक्टर को पत्र भेजकर अवगत करवाया गया है और इसके साथ ही स्कूली छात्रों के लिए स्कूलों में मीड डे मिल का राशन समय पर उपलब्ध करवाने के लिए जरूरी दिशा निर्देश देने के लिए कांग्रेस पार्टी की छात्र इकाई द्वारा मांग की गई है।

मीड डे मिल के राशन का समान नहीं रहा

कांग्रेस नेता दीपांशु बंसल ने खंड पिंजौर के दर्जनों स्कूलों का उदाहरण देते हुए कहा कि उन्हें इस बारे सूचना प्राप्त हुई है कि स्कूलों में मीड डे मिल के राशन का समान नहीं आ रहा है,आलम यह है कि कुकिंग कॉस्ट के पैसों से ही ड्राई समान बच्चों को देना पड़ रहा है या उधार लेकर बनाते है या फिर स्वयं स्त्रोतों से खाना बनता है।

बच्चों को मीड डे मिल का राशन उपलब्ध करवाने के लिए कहा

मिड-डे मील (एमडीएम) योजना का मुख्य उद्देश्य सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले कक्षा 1 से 8 तक के बच्चों को गुणवत्तापूर्ण भोजन उपलब्ध कराना है परंतु अब आलम यह है कि सरकारी स्कूलों में भोजन उपलब्ध करवाने के लिए राशन ही उपलब्ध नहीं करवाया जा रहा है जोकि चिंतनीय विषय है,ऐसे में कांग्रेस छात्र इकाई एनएसयूआई के राष्ट्रीय प्रवक्ता दीपांशु बंसल एडवोकेट ने शिक्षा मंत्री हरियाणा और डायरेक्टर को पत्र लिखकर इस मामले में संज्ञान लेते हुए बच्चों को मीड डे मिल का राशन उपलब्ध करवाने के लिए कहा है,साथ ही यह भी कहा है कि यदि हरियाणा सरकार मीड डे मिल योजना के तहत हरियाणा भर साथ ही पिंजौर खंड में सरकारी स्कूलों को राशन नहीं दे सकती तो अपनी असमर्थता दिखाते हुए अवगत करवाए, वह स्वयं अपनी तरफ से बच्चों को राशन उपलब्ध करवाने के लिए कार्य करेंगे।गौरतलब है कि दीपांशु बंसल पहले भी इस स्कीम में एक स्कूल में राशन खत्म होने पर डोनेशन दे चुके है और अब उन्होंने प्रदेश सरकार से इस संदर्भ में आग्रह भी किया है।

दीपांशु बंसल का कहना है कि यह चिंतनीय विषय है कि पिंजौर ब्लाक जैसे पूरे हरियाणा में काफी ऐसी जगह है जहां मीड डे मिल का राशन खत्म है,और काफी समय से खत्म है परंतु स्कूल प्रशासनों द्वारा अधिकारियों को अवगत कराए जाने के बावजूद भी बच्चों के लिए राशन उपलब्ध नहीं करवाया जाता,ऐसे में स्कूलों में राशन खत्म होता है,तो स्कूलों को स्वयं अपने स्त्रोतों से राशन का इंतजाम करना पड़ता है।इस राशन में आटा और चावल आता है,लगभग महीनों महीनो तक यह राशन स्कूलों में नहीं भिजवाया जाता जिसके लिए उपयुक्त कदम उठाकर नीति बनाया जाना जरूरी है।